Tuesday, 29 September 2026
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चुनाव लड़ने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ी तो हार के बाद वापसी नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी अपनी इच्छा से नौकरी से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ता है, तो चुनाव में हार या जीत के बाद वह केवल इस आधार पर दोबारा सरकारी सेवा में बहाली का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि चुनाव हार जाना इस्तीफा वापस लेने के लिए नियमों में निर्धारित बाध्यकारी परिस्थितियों में बदलाव नहीं माना जा सकता। यह फैसला जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने नीरज बिश्नोई की याचिका पर सुनाया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), जयपुर के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कर्मचारी की सरकारी सेवा में दोबारा बहाली की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।

विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिया था इस्तीफा

मामला नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत रहे नीरज बिश्नोई से जुड़ा है। उन्होंने राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर 2023 को अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया था। विभाग ने उनका इस्तीफा 1 नवंबर 2023 से स्वीकार कर लिया था। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद नीरज बिश्नोई ने चूरू जिले की रतनगढ़ विधानसभा सीट से BSP के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि, चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में हार के बाद उन्होंने 1 जनवरी 2024 को विभाग के सामने इस्तीफा वापस लेने और सरकारी सेवा में दोबारा बहाल किए जाने का अनुरोध किया। विभाग ने 29 जनवरी 2024 को उनकी मांग खारिज कर दी। इसके बाद उनकी ओर से की गई मांग को भी 22 फरवरी 2024 को स्वीकार नहीं किया गया।

पेंशन और रिटायरमेंट लाभ का दिया तर्क

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने इस्तीफा वापस लेने के लिए नियमों में निर्धारित 90 दिन की अवधि के भीतर आवेदन किया था। उनका कहना था कि नौकरी से इस्तीफा देते समय उन्हें इस बात की पूरी जानकारी नहीं थी कि इस्तीफा देने के कारण उनके पेंशन और अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट पर असर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, चुनाव हारने के बाद उन्हें पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े संभावित नुकसान की जानकारी हुई। इसलिए परिस्थितियों में बदलाव को आधार मानते हुए उनका इस्तीफा वापस लेने और सरकारी सेवा में बहाली की अनुमति दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने क्यों खारिज की बहाली की मांग?

विभाग की ओर से इस दलील का विरोध किया गया। विभाग ने कहा कि कर्मचारी ने चुनाव लड़ने के लिए सोच-समझकर और अपनी इच्छा से सरकारी नौकरी छोड़ी थी। उन्होंने जिस उद्देश्य से इस्तीफा दिया था, उस उद्देश्य के तहत विधानसभा चुनाव भी लड़ा। ऐसे में चुनाव में हार जाने के बाद अपने फैसले से पीछे हटकर सरकारी सेवा में दोबारा नियुक्ति का दावा नहीं किया जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि चुनाव में हार जाना इस्तीफा वापस लेने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने के बाद पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट से होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी मिलना ऐसी बाध्यकारी परिस्थिति नहीं है, जिसे नियमों के तहत इस्तीफा वापस लेने का आधार माना जाए। कोर्ट के इस फैसले का सीधा संदेश यह है कि सरकारी सेवा छोड़ने का फैसला यदि किसी कर्मचारी ने अपनी इच्छा से किसी चुनावी उद्देश्य के लिए लिया है, तो चुनाव परिणाम बदलने के बाद केवल हार के आधार पर वह सरकारी नौकरी में वापसी का अधिकार नहीं मांग सकता। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर नीरज बिश्नोई की याचिका खारिज कर दी और CAT जयपुर के फैसले को बरकरार रखा।

Ayush Pareek

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