राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती इंटेलिजेंस करियर से जुड़ा एक पुराना अनुभव साझा किया है। IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में उन्होंने बताया कि जब वह 20 की उम्र में थे और सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब एक मिशन पर भेजी गई उनकी टीम चीनी सेना की हिरासत में पहुंच गई थी। उस समय डोभाल को लगा था कि इस घटना के बाद उनका करियर खत्म हो सकता है।
सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे डोभाल
डोभाल ने बताया कि वह उस समय एक युवा IPS अधिकारी थे और इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नए थे। उन्हें सिक्किम में तैनात किया गया था। उनकी जिम्मेदारियों में सीमा क्षेत्र पर नजर रखना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाना शामिल था। यह वह दौर था जब सिक्किम के भारत में पूर्ण एकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी। सिक्किम 1975 में भारतीय संघ का हिस्सा बना था।
मिशन पर गई टीम वापस नहीं लौटी
डोभाल के मुताबिक, एक बार उन्होंने सीमा क्षेत्र में एक टीम को इंटेलिजेंस मिशन के लिए भेजा। टीम को कुछ दिनों में वापस लौटना था, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद उसकी कोई जानकारी नहीं मिली।
कई दिन गुजरने के बाद भी टीम के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं आई। डोभाल ने बताया कि इस दौरान उन्हें यह चिंता सताने लगी कि टीम के सदस्यों के साथ आखिर क्या हुआ। किसी प्राकृतिक आपदा या हिमस्खलन की भी कोई सूचना नहीं थी।
इसी बीच उन्हें मुख्यालय से फोन आया। उनके वरिष्ठ अधिकारी ने पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा था। डोभाल ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि टीम वापस लौट रही होगी। इसके बाद उन्हें जानकारी दी गई कि टीम को चीनी सेना ने पकड़ लिया है और उनसे पूछताछ की गई है।
चीनी हिरासत से वापस लौटे एजेंट
डोभाल के मुताबिक, कुछ समय बाद भारतीय टीम के सदस्य वापस लौट आए। उन्होंने कहा कि संभवत: बातचीत या किसी समझौते के बाद उनकी रिहाई हुई थी। डोभाल ने बताया कि वापस लौटने पर टीम के सदस्य काफी खराब हालत में थे।
इस घटना के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई। उस समय युवा डोभाल को लगा कि यह उनके करियर का अंत हो सकता है। उन्होंने IIT रुड़की में अपने संबोधन के दौरान बताया कि उन्हें यह घटना बेहद गैर-पेशेवर लगी और वह मान चुके थे कि अब उन्हें अपना करियर बदलना पड़ेगा।
जांच में डोभाल को मिली क्लीन चिट
जांच पूरी होने के बाद डोभाल को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया। उनके मुताबिक, जांच में सामने आया कि मुख्यालय से टीम को दिए गए नक्शों और स्केच में कुछ गलतियां थीं। इसलिए उन्हें दोषी नहीं पाया गया।
उन्होंने बताया कि घटना के बावजूद यह उनके लिए बेहद कठिन दौर था। इसी दौरान उनके साथ काम करने वाले एक तिब्बती शेरपा ने उन्हें जिंदगी को देखने का एक अलग नजरिया दिया।
शेरपा की तीन बातें जो डोभाल को आज तक याद हैं
डोभाल ने बताया कि शेरपा ने उनसे कहा था कि पूरी स्थिति को समझने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं—आपको पता होना चाहिए कि आप कहां हैं, आपको कहां जाना है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है। डोभाल के अनुसार, यह सलाह बाद में उनके लिए जिंदगी को समझने का एक तरीका बन गई।
IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में डोभाल ने यह अनुभव युवाओं के साथ साझा करते हुए बताया कि मुश्किल परिस्थितियां करियर या जीवन की दिशा तय करने का अंतिम पड़ाव नहीं होतीं। उनके अनुसार, सही दिशा और रास्ते की पहचान आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।




