उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने पार्टी में अपने दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला उनके पूर्व OSD और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के एक दिन बाद आया है। रावत ने कहा कि उनकी वजह से पार्टी की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर नहीं होनी चाहिए, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है।
हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति में स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने साफ किया कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए उनका इस्तीफा पार्टी के संगठनात्मक पदों से है। रावत ने अपने इस फैसले को पार्टी की छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई से जोड़कर बताया।
चंदन सिंह जीना के घर ED की कार्रवाई
यह पूरा मामला 2016 में हुई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच के बीच सामने आया है। ED ने 10 सितंबर को देहरादून में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इनमें चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल था। जांच एजेंसी के मुताबिक जीना पहले हरीश रावत के OSD रह चुके हैं और वर्तमान में उनके निजी सहायक के तौर पर जुड़े हुए हैं।
तलाशी के दौरान करीब 32 लाख रुपये की नकदी, सोना और महंगी घड़ियों समेत करीब 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी का मामला कथित तौर पर 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच में OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ का एंगल भी सामने आया है। मामले की जांच अभी जारी है।
हरीश रावत ने आरोपों पर जताया अविश्वास

ED की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने अपने सहयोगी चंदन सिंह जीना का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उन्हें लगाए गए आरोपों पर विश्वास नहीं है। रावत ने यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई के पीछे राजनीतिक मकसद हो सकता है और आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनके सहयोगी के खिलाफ कार्रवाई के जरिए एक राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, रावत ने यह भी कहा कि यदि उनके कार्यकाल के दौरान किसी नियुक्ति प्रक्रिया में कोई गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने अपने कार्यकाल में हुई सरकारी भर्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान 42 हजार से अधिक नियुक्तियां की गई थीं।
पार्टी की लड़ाई कमजोर न हो, इसलिए लिया फैसला
हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है और उनकी वजह से इस संघर्ष पर किसी तरह का असर नहीं पड़ना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक पदों से हटने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह कदम कांग्रेस से अलग होने का फैसला नहीं है। वह पार्टी के साथ बने रहने और उसके राजनीतिक संघर्ष में योगदान देने की बात कह चुके हैं। ताजा घटनाक्रम के बीच उनका इस्तीफा उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ED की कार्रवाई, उसके बाद हरीश रावत का इस्तीफा और उनके सहयोगी से जुड़ी जांच ने राज्य की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है और आरोपों की अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं हरीश रावत ने अपने इस्तीफे के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि व्यक्तिगत स्तर पर उठे विवाद का असर पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति पर नहीं पड़ना चाहिए।




