Monday, 28 September 2026
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किशोर कुमार की बायोग्राफी पर विवाद: पटना हाईकोर्ट ने केंद्र और NFDC से मांगा जवाब

दिल्ली : महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार की जिंदगी पर लिखी गई चर्चित बायोग्राफी को लेकर अब कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। पटना हाईकोर्ट ने ‘Kishore Kumar: The Ultimate Biography’ को नेशनल फिल्म अवॉर्ड में Best Book on Cinema की श्रेणी में दिए गए सम्मान को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किशोर कुमार की बायोग्राफी को सिनेमा पर आधारित पुस्तक की श्रेणी में किस आधार पर शामिल किया गया। 

यह किताब लेखक अनिरुद्ध भट्टाचार्य और पार्थिव धर ने लिखी है। पुस्तक में किशोर कुमार के जीवन, संगीत, अभिनय और हिंदी सिनेमा में उनके लंबे योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। किताब को 2024 में National Film Award for Best Book on Cinema मिला था।

हाईकोर्ट ने क्यों मांगा जवाब?

पटना हाईकोर्ट में दायर याचिका में इस बात पर सवाल उठाया गया है कि किशोर कुमार की व्यक्तिगत जीवनी को सिनेमा से संबंधित पुस्तक की श्रेणी में कैसे माना गया। इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और NFDC को नोटिस जारी किया।

कोर्ट यह जानना चाहता है कि संबंधित पुरस्कार की श्रेणी के लिए निर्धारित नियमों और मानदंडों के तहत इस किताब को किस आधार पर योग्य माना गया। मामले में सरकार और संबंधित संस्था से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा गया है।

क्या है ‘Kishore Kumar: The Ultimate Biography’?

‘Kishore Kumar: The Ultimate Biography’ किशोर कुमार के जीवन और उनके बहुआयामी करियर पर आधारित पुस्तक है। इसमें उनके शुरुआती जीवन से लेकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनके सफर, गायकी, अभिनय, संगीत और फिल्म निर्माण से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है।

किशोर कुमार सिर्फ एक मशहूर प्लेबैक सिंगर ही नहीं थे, बल्कि अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, संगीतकार और गीतकार के तौर पर भी उन्होंने काम किया। उन्होंने हिंदी के अलावा कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए थे।

2024 में मिला था नेशनल फिल्म अवॉर्ड

इस बायोग्राफी को 70वें National Film Awards में Best Book on Cinema का पुरस्कार मिला था। किताब 2022 में प्रकाशित हुई थी और इसमें किशोर कुमार के फिल्मी करियर के साथ-साथ उनके निजी जीवन और व्यक्तित्व के कई पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

किताब को सम्मान मिलने के बाद अब इसकी पात्रता को लेकर कोर्ट में सवाल उठना इस मामले को और महत्वपूर्ण बना देता है। हालांकि, हाईकोर्ट का नोटिस जारी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पुरस्कार देने का फैसला गलत था। फिलहाल कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

किशोर कुमार का सिनेमा में योगदान

किशोर कुमार भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और बहुमुखी कलाकारों में गिने जाते हैं। उनकी पहचान खास तौर पर एक महान प्लेबैक सिंगर के रूप में रही, लेकिन उन्होंने अभिनय, निर्देशन, निर्माण और संगीत के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किया।

उन्होंने ‘चलती का नाम जिंदगी’, ‘पड़ोसन’, ‘दूर का राही’ और ‘दूर गगन की छांव में’ जैसी फिल्मों से अभिनय और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज और गायकी की शैली ने हिंदी फिल्म संगीत पर लंबे समय तक प्रभाव डाला।

आगे क्या होगा?

अब पटना हाईकोर्ट में केंद्र सरकार और NFDC की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा। कोर्ट के सामने यह स्पष्ट किया जाएगा कि बायोग्राफी को Best Book on Cinema की श्रेणी में शामिल करने का आधार क्या था और संबंधित पुरस्कार नियमों में ऐसी किताबों के लिए क्या प्रावधान हैं।

फिलहाल इस मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है। अगली सुनवाई में सरकार और NFDC के जवाब के बाद अदालत इस विवाद पर आगे की दिशा तय करेगी।

Ayush Pareek

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