कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लेकर चल रहा आंतरिक विवाद अब चुनावी प्रक्रिया तक पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले के बाद फिलहाल दोनों गुट पुराने All India Trinamool Congress (AITC) नाम और उसके पारंपरिक ‘दो फूल और घास’ वाले चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम दिया गया है और उसके लिए ‘Football Player’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ यानी लिफाफा चुनाव चिन्ह दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू रहेगी।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया यह फैसला?
चुनाव आयोग के सामने TMC पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों ने अपना-अपना दावा पेश किया था। आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि उसके सामने दो प्रतिद्वंद्वी समूह हैं, जो खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं। ऐसे में पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया की जरूरत है।
आयोग ने यह भी कहा कि आगामी उपचुनावों के लिए समय सीमित है। इसलिए अंतिम विवाद निपटने तक दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग नाम और उपलब्ध चुनाव चिन्ह आवंटित करने की अंतरिम व्यवस्था की गई है। अंतिम फैसला Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत होने वाली प्रक्रिया के बाद किया जाएगा।
6 अक्टूबर को होंगे दो विधानसभा उपचुनाव
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक इन दोनों सीटों के लिए वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। इन चुनावों में दोनों TMC गुटों को नए नाम और नए चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा।
नंदीग्राम सीट सुवेंदु अधिकारी के दूसरी सीट बनाए रखने के बाद खाली हुई, जबकि रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव के कारण चुनाव आयोग के लिए पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह का मुद्दा तत्काल तय करना जरूरी था।
ममता गुट ने फैसले पर जताया विरोध
चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी के गुट ने फैसले पर विरोध दर्ज कराया। रिपोर्ट के अनुसार, ममता गुट ने नए नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प आयोग को ‘strongest protest’ के साथ भेजे। इसके बाद आयोग ने शुक्रवार को दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग नाम और चिन्ह आवंटित किए।
दूसरे गुट की ओर से भी TMC पर नियंत्रण को लेकर दावा किया गया है। चुनाव आयोग के सामने दोनों पक्षों के दस्तावेज और संगठनात्मक नियंत्रण से जुड़े दावे विचाराधीन हैं। इसलिए शुक्रवार का फैसला पार्टी के अंतिम स्वामित्व का निर्णय नहीं है, बल्कि आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था है।
28 साल बाद बदली TMC की चुनावी पहचान
इस घटनाक्रम का असर TMC की चुनावी पहचान पर भी पड़ा है। 1998 में पार्टी के गठन के बाद पहली बार आगामी इन उपचुनावों में ‘All India Trinamool Congress’ नाम और उसका पारंपरिक चुनाव चिन्ह इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की है।
फिलहाल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम विवाद चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है। आगे होने वाली सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग इस विवाद पर अंतिम निर्णय लेगा।




