Tuesday, 29 September 2026
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राजस्थान निकाय चुनाव में बाड़ेबंदी पर घमासान: पुलिस पर पार्षदों को दबाव में लेने के आरोप, गहलोत-डोटासरा ने घेरा

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद अब महापौर, सभापति और पालिका अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पार्षदों की बाड़ेबंदी के बीच कांग्रेस ने भाजपा सरकार और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि कुछ जगहों पर पुलिस और प्रशासन के जरिए पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

बाड़ेबंदी को लेकर बढ़ा सियासी तनाव

नगर निकायों में बोर्ड गठन से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। कई जगहों पर पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में ठहराया गया है। इसका मकसद मतदान से पहले किसी भी तरह की टूट या क्रॉस वोटिंग को रोकना बताया जा रहा है।

कांग्रेस का आरोप है कि उसकी बाड़ेबंदी वाले स्थानों पर पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ के जरिए पार्षदों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। डोटासरा ने दावा किया कि प्रदेश के कई स्थानों पर कांग्रेस पार्षदों के ठहरने वाले होटलों में पुलिस पहुंची।

डोटासरा ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है। उनके मुताबिक, जिन जगहों पर कांग्रेस के पार्षद बाड़ेबंदी में हैं, वहां पुलिस की गतिविधियां बढ़ गई हैं।

डोटासरा ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर मामला बताते हुए सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि निर्वाचित पार्षदों को अपनी इच्छा से मतदान करने का अधिकार है और उन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए।

अशोक गहलोत ने भी BJP पर लगाया आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी निकाय चुनावों में कथित खरीद-फरोख्त और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। गहलोत का आरोप है कि भाजपा निर्दलीय और विपक्षी पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।

गहलोत ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर पार्षदों को प्रभावित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है और पार्टी ने कांग्रेस पर ही अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी करने का आरोप लगाया है।

कई जगह मुकाबला बेहद करीबी

राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन कई निकायों में बोर्ड गठन के लिए स्पष्ट बहुमत नहीं है। भाजपा ने 4,179 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड आए। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी 2,273 वार्ड जीतकर कई जगहों पर समीकरण बदल दिए हैं।

यही वजह है कि अब महापौर और सभापति के चुनाव में निर्दलीय और असंतुष्ट पार्षद बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। दोनों प्रमुख दल ऐसे पार्षदों को अपने पक्ष में रखने की कोशिश कर रहे हैं।

21 सितंबर को कई निकायों में चुनाव

राजस्थान में 21 सितंबर को कई नगर निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है। इसी वजह से अंतिम समय में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। कुछ निकायों में बहुमत का आंकड़ा बेहद करीबी है, जहां एक-दो पार्षदों का रुख भी पूरे बोर्ड का समीकरण बदल सकता है।

फिलहाल राजस्थान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि निकाय बोर्डों पर किस पार्टी का कब्जा होता है। बाड़ेबंदी, निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच आने वाले मतदान से पहले दोनों दल अपने-अपने गणित को मजबूत करने में जुटे हैं।

Ayush Pareek

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